Saturday, June 12, 2021 - 23:11

गोंडवाना छत्तीसगढ़ न्यूज की ओर से (ब्यूरो चीफ दीपककुमार उदय)
कोरबा (GCG NEWS) 18 दिसंबर 2020 सच और सबसे गंभीर समस्या से उपजी सवाल छत्तीसगढ़ राज्य स्थित कोरबा जिले के पोंडी उपरोड़ा के अधीनस्थ ग्राम पंचायत अड़सरा के अंर्तगत पंडोपारा की है।जहां पर विशेष संरक्षित जन जाति बैगा और पंडों आदिवासी निवास करते हैं। जो जिले का एकमात्र ऐसा ग्राम पंचायत है। जहां के ये गरीब वेसहारा पंडों आदिवासियों को खाद्यान के लिए 15 किलोमीटर दूर अपने पंचायत मुख्यालय अड़सरा राशन दूकान हेतू पैदल ही जाना पड़ता है। यह विल्कुल अलग थलग सा जगह है। बीजाडांड पहाड़ी के घोर जंगल जिसे तिरिया जंगल के नाम से जाना जाता है । जिसके उतरी तराई जो पहाड़ी के नीचे पंडोपारा बस्ती स्थित है। जहां केवल बैगा पण्डो के आलावा कुछ दशक पहले कुछ और जन जाति के लोग सरगुजा से आकर यहाँ शासकीय जंगलो में आकर बस गये हैं। आमतौर पर दरअसल ये पंडो आदिवासी 50 सालों से भी अधिक साल से यहां के जंगलों में अपना जीवन यापन कर रहे हैं। संबन्धित अड़सरा ग्राम पंचायत का सबसे सुदूर और बीहड़ जगहों में से एक है। जहां आने जाने का कोई सड़क तक नहीं है। जिनके पास न तो स्थायी कोई भूमि स्वामित्व है। न इससे जुड़े कोई अधिकार पत्रक है। न तो कोई सुविधाएँ है। ऐसे जगहों में बसे ये पंडो आदिवासी जिनके नाम पर फिलहाल जिनके राशन कार्ड तक नहीं है। दरअसल बीते दिनों 11 दिसंबर को एक जंगली हाथी द्वारा बुधनीबाई पण्डों जिसे कुचल कुचल कर मार डाला था। जिस सिलसिले से घटना की जानकारी लेने पहुंचे, गोंडवाना छत्तीसगढ़ न्यूज द्वारा एक अन्य चौकाने वाला खुलासा सामने आया। आमतौर पर सरकार द्वारा कमजोर तबको के लिए सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान बना कर देने की योजना है । लिहाजतन सवाल यह है, कि जंगलो में बसे अत्यंत कमजोर वर्गों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजनाओ के तहत यहां पक्के का मकान बनाएं जाने का उद्देश्य ही कुछ और निकला । यह तो साफ है,कि पंचायती राज व्यवस्था के तहत सरपंच सचिवो की मिलीभगत से ऐसे दलाल जिनका एक जाल होता है। और पंचायत सरपंच सचिवो की सह से वेसहारा कमजोर वर्ग जिनके नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मकान स्वीकृति होती है।जिसे बनवाने के लिए दलालों द्वारा मरे गिद्ध की भांति जिनका दृष्टि होता है। दलालों द्वारा सरपंच सचिवों से बात कर मकान बनाने का जिम्मेदारी ले लेते हैं। अलबत्ता शिक्षा से अज्ञान अंगूठा छाप जिन्हें बैक ले जाने की झंझट से स्थानीय बैंक ग्राहक सेवा केन्द्रों में ले कर भोले भाले आदिवासी लोगों को स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास की किश्तों को जिनका अंगूठा को दबवा कर दलालों द्वारा सारी रकम निकाल लेते हैं। कमोवेश मकान बने या न बने।जिनका जिम्मेदारी राशि निकालने के बाद खत्म हो जाती है। यह कोई अतिशयोंक्ति नहीं बल्कि कोरबा जिले के ग्राम पंचायत अड़सरा के पण्डोंपारा स्थित रामसाय पिता सुखलाल पण्डो जिसके नाम पर बने यह केन्द्र सरकार की योजना प्रधानमंत्री आवास योजना का मकान जिस मकान कोई तकनीकी मापदंड नहीं है। डेढ़ लाख करीब का यह आवास योजना कागजी तौर पर पूर्ण रूप से बन चुका है। पर सच तो यह है कि तहकीकात की आइने में आज भी प्रधानमंत्री आवास योजना का यह मकान आज भी अधूरा है।
ऐसे यहां आधा दर्जन से अधिक ऐसे आवास योजना की मकान हैं।जिसका सभी किश्तों को निकालने के बाद भी अधूरा है। सरपंच सचिव सहित पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारी तक को यह दृश्य किसी से छिपी नहीं है। स्थानीय पण्डों आदिवासियो की दशा यहां पर आज भी जस की तस बनी हुई है। छोटे छोटे अधखिले बच्चे तीर धनुष तथा गुलेल की थैली लटकाये देखे गए। यह है देश की सच्ची आजादी की हकीकत तश्वीर जो आज भी बुनियादीं सुविधाएँ से कोसों दूर हैं।

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