Monday, October 25, 2021 - 22:06

Repot by- gondwana chhattisgarh news
कोरिया- जिले के भीतर उत्तरप्रदेश, विहार, झारखंड सहित कई अन्य प्रान्तों से आकर बसे लोग स्थायी तौर पर बसने के लिए स्थानीय अनुसूचित जाति जनजातियों के महिलाओं को अपने झूठी माया जाल में लपेट कर उनके नाम पर आदिवासियों के लिए सरकारी प्रतिबंधित होने के बाद भी जिनके जगह जमीनों को हड़पने के लिए एक नया पैतरा अपना लिये हैं।भोले भाले ऐसे तबकों को निवाला बनाते हैं। देखते हैं कि इनके परिवार में कोई पढ़ा लिखा उतना ज्यादा नहीं है।और हाइवे के किनारे सटे किस आदिवासी वर्ग का कीमती जमीन है।जिनको औने पौने दामों में अपने जाल में फसाये आदिवासी रखैल महिलाओं के नाम पर ये गैर जमात के लोग खरीद लेते हैं। सबसे ज्यादा कोरिया जिले के पटना अम्बिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग के कस्बाई हल्कों में भूमि माफियाओं का गहरी नेटवर्किंग चल रही है। अगर आदिवासी समुदाय ऐसे माफियाओं के विरूध्द आगे नहीं आते तो आदिवासियों की सामाजिक सांस्कृतिक जीवन खतरे में आ सकती है। इस बात की खुलासा करते हुए राजस्व विभाग के एक कार्यालय में काम करने वाले एक ऐसे ही पीड़ित आदिवासी युवक ने गोंडवाना छत्तीसगढ़ न्यूज को एक जानकारी में दी है और कहा है कि मेरे जमीन में एक आदिवासी महिला आदिवासी शिक्षिका जो मूलरूप से मुंगेली जिले के कसेरी गांव का गोंड़ आदिवासी होने का जाति प्रमाण पत्र कोटा राजस्व विभाग से लिया है। जिसके नाम पर एक उत्तरप्रदेश से आकर बसे प्रतिबंधित आदिवासी वर्ग की भूमि को वैनामा तरीके से क्रय कर राष्ट्रीय राजमार्ग में सटे भूमि में मकान बनाकर दुकान खोल दिया है। क्रेता एक आदिवासी महिला सरकारी स्कूल मे शिक्षिका है। जो पटना स्थित एक किराये के मकान में रहती है। वहीं बाहरी मुसाफिर यहाँ आलीशान मकान दुकान बनाकर रह रहा है। बहरहाल ऐसे घटनाओं के प्रति अब आदिवासी समाज मे कोई जागरूकता व एकजुटता नहीं आयी,तो आदिवासी समुदाय धीरे धीरे विलुप्त हो जायेंगे।और आने वाले पीढ़ी का अस्तित्व समाप्त हो सकता है।ऐसे ही एक सबसे तकलीफ देह घटना सामने आयी है।जो कोरबा जिले के पोंडीखुर्द पोंड़ी उपरोड़ा तहसील निवासी एक गोंड़ आदिवासी विधवा, दो बच्चे की माँ जिनके पति को बीते दिनों एक हाथी ने कुचल डाला था। लिहाजा वन विभाग द्वारा 6 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिया गया था।जिस बाबत पैसे मिलने की भनक लगते ही कोरबी सरमा गाँव में बनारस उत्तरप्रदेश से आकर बसे एक बाहरी व्यक्ति जो मरे गिद्ध की भांति पैसे को मिले पैसे को छीनने के लिए षड्यंत्र रचा और उक्त महिला को अपने चिकनी चुपड़ी जाल में फ़ांस कर झपट लिया।और अपने अपने पत्नी बच्चे परिवार को छोड़कर इन दिनों उक्त आदिवासी महिला के साथ बैकुण्ठपुर एक किराये के मकान रहने की जानकारी है। वहीं जिनके दो दूधमुहें बच्चे अपने माँ के लिए तड़फ रहे हैं।जिस महिला की पारिवारिक भोलेपन का लाभ उठाकर तथा उसके पैसे को निचोड़ने के लिये उक्त बाहरी गैर तबका साथ साथ चल रहा है।उसके बाद साफगोई है कि जैसे ही 6 लाख रुपये को उक्त चतुर चालाक व्यक्ति द्वारा पूरा पैसा के अलावा उसके अस्मिता को निचोड़ नही लेगा। कि उक्त विधवा आदिवासी महिला को साथ साथ रखेगा।उसके बाद दूध में पड़े मक्खी जैसे निकाल कर फेक देगा। फिलहाल दबे जुबान इस घटना को लेकर गोंड़ आदिवासी समाज गुस्सा में तो है । गैर बाहरी व्यक्ति राजनीतिक प्रभावशाली होने के कारण उसके विरुद्ध कोई आदिवासी वर्ग के लोग इस मार्मिक घटना पर हाथ डालना नहीं चाहते। इस प्रकार की सैकड़ों घटना आदिवासी हल्कों में इन दिनों एक आम बात होते जा रही है। यदि आदिवासी समाज के सामाजिक संगठनों द्वारा ऐसे घटनाओं को लेकर संवेदनशील नहीं हुए तो आदिवासी सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत समाज की अस्मिता और सम्मान के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। इस प्रकार की घटनाओं पर आदिवासी समाज द्वारा मुंह न खोलना सबसे बड़ी दुःख होगी।

शेयर करे

Add a Comment