Monday, March 8, 2021 - 23:49

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(SHAURY KUMAR UDAY)
गौरेला पेंड्रा मरवाही- (चुनावी डेस्क)(GCG NEWS) जानकारी की मानें तो राजनीतिक तौर पर छत्तीसगढ़ राज्य मुख्यालय के उत्तरी सरहदी हल्कों के बहुचर्चित इलाका मरवाही में हो रहे उप चुनाव में जीत की कवायद को लेकर हर लोगों की कयास तेज हो गई है। चुनावी दौर की नजदीकियां आते ही इन दिनों हर राजनैतिक दल मौजूदा वक्त में अपने अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए यहां बड़े बड़े नेताओं द्वारा मतदाताओं के घर घर की दहलीज नाप रहे हैं। सूत्रों की मानें तो प्रदेश भर के अलग अलग कद काठी वाले हर प्रभावशील नेताओं ने विधानसभा क्षेत्र के अंदरुनी इलाकों के चप्पे चप्पे में जाकर अपने अपने राजनीतिक ढाल को तेज कर रहे हैं। वहीं आदिवासी अंदरुनी क्षेत्रों में मातहत आदिवासी जिंदगी को संवारने के लिए हर दल अपने अपने वायदे भी कर रहे हैं। साथ ही साथ जीत के लिए हर दल के नेताओं ने गाहे बगाहे हर चुनावी नीतियों से लोगों को लुभा रहे हैं। दरअसल भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच सच माने तो यहां गहरी खाई है। नतीजतन अमित जोगी की जातिगत अदालती फैसले पलट जाने से कतिपय सतारुढ़ पार्टियों की जीत की आईना फिलहाल मरवाही की जीत के लिए चुनौतियों से कम नहीं है। लिहाजतन गरीबी और असमानताओं के बीच यहां के कई आदिवासी जो आज भी विकास के अर्थ को नहीं जानते। ऐसे इलाकों में खासा दबदबा रखने वाले गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का प्रभाव यहां के लोगों के बीच सूरज की किरणों से कम नहीं है। अब ऐसे इलाकों में भाजपा कांग्रेस के नेताओं द्वारा इस चुनावी दौर में गाल बजा बजा कर अपना भाषणों की बौछारें मार लें, जो अंधे और हाथी की कहानी से कम नहीं होगी। ऐसे सारे सवालोँ के बीच जी रहे यहाँ के बहु संख्यक आदिवासी अब वोट बैंक की महत्व को समझने लगे हैं।अब किसी दल के वोट बैंक बनना नहीं चाहते। कुल मिलाकर अपने अधिकारों की समरसता को अब अच्छी तरह समझने लगे हैं। सारे सवालों के बीच इस चुनावी दौर में एक गोंड़ आदिवासी महिला जिसे एक सतारुढ़ दल के एक गैर वर्ग के नेता परिवार द्वारा जिनके अपहरण की कथित घटनाओ को लेकर इस समय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी नया पेंच खड़ा कर दिया है। वैसे ही क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय के महिलाओं को लेकर वर्गों द्वारा आदिवासियों के अचल संपतियों को कब्जियाने की मामले भी इस चुनावी दौर में खुल कर चर्चा में है। अब लाजिमी है कि आदिवासी क्षेत्रों मे यहां की वोट बैंक को सेंध मरना अब भाजपा और कांग्रेस के लिए नया मुशीबतों से कम नही होगी। वहीं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा मरवाही के ऐसे आदिवासी इलाकों जहां सेंध मारने में सफल दिखायी दे रही है। जो पहले जोगी के हल जोतता किसान एक छाप बन गया था।जहां अब आरी की झलक दिखाई दे रही है। वहीं के यहां पिछड़े वर्ग के श्रेणी में आने वाले पनिका जाति जो मरवाही से सटे मध्यप्रदेश सीमा के फर्लांग भर की दूरी में पनिका जाति आदिवासियों की श्रेणी में हैं। पर छत्तीसगढ़ में नहीं,अब जिनके बेटी जब समाज मे विवाहिता के रूप में आते हैं तो पिछड़े वर्गों में गिनती होती है।और छत्तीसगढ़ से वहां जाते हैं तो आदिवासी यह नियम गलत है।ऐसे सरकारी सवाल में घिरे, फिलहाल इस नब्ज को पकड़ चुके गोंडवाना के नेताओं के लिए यह वर्ग का वोट बैंक जिनके लिये एक खासा आधार है। ऑटो परिवहन संघ के प्रदेश अध्यक्ष पी पनिका ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रत्याशी रितु पन्द्राम के प्रति आभार जताते हुए उन्होंने कहा है कि, हम गोंगपा के पक्ष मे निष्ठा के साथ जनमत दिलायेंगे, गौरतलब इस चुनावी मैदान में साथ साथ दिखायी दे रहे हैं। जिससे एक खासा प्रभाव रखने वाले पनिका समाज का समर्थन से अन्य राजनैतिक दल सकते में है।साथ ही साथ अन्य राजनैतिक सतारुढ़ दल भी इस चुनाव में अपने अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए चोटी की जोर मार रहे हैं। अहम और लाजिमी सवाल यहां की अंदरूनी कुछ बातों को मानें, तो भाजपा और कांग्रेस पार्टी की प्रत्याशियों को लेकर इस आदिवासी बाहुल्य इलाकों में कुछ तरह तरह की जुबानी जंग जारी है। स्थानीय प्रभावशील लोगों की ओर से जो तथ्य सामने है, कमोबेश चुनौतियों से कम नहीं है।एक प्रत्याशी पर क्षेत्र से बाहरी होने छाप बन चुका है वहीं दूसरे पर सामाजिकता की गहरी जख्म है। नतीजतन दोनों पार्टियों के बीच गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी इन दिनों अंदरूनी हल्कों में लगातार नुक्कड़ बैठकें आयोजित कर अपनी ताकत बढ़ा रही है। बहरहाल कांग्रेस भाजपा के लिए यह चुनौतियों से कम नहीं है। वहीं यह सब जानते हैं, कि जोगी के बिना जग अंधियार भले ही है। पर जीत तो हमारे ही पक्ष में होगी। यह तो सच है कि जोगी के आशा पर जी रहे दोनों दल जिनके जोर अजमाइश की राजनीतिक डोरी किसके पाले में आएगी। यह कह पाना जल्दबाजी होगी। और जीत भी किसके पाले में होगी, सुनिश्चित नहीं है।

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